Wednesday, 21 June 2017

अपठित २१
मैं कक्षा तीन में पढ़ता हूँ | मेरे विद्यालय का नाम सरस्वती विद्यामंदिर हैं | यह शहर का सबसे प्रसिद्ध विद्यालय है | यह बहुत बड़ा है | मेरे विद्यालय में लगभग पाँच हजार विद्यार्थी पढ़ते हैं | विद्यालय के सभी अध्यापक अध्यापिकाएँ बहुत ही अच्छे हैं | वे सभी विद्यार्थियों का बहुत ध्यान रखते हैं | उनकी हर समस्या को ध्यान से सुनकर उसका समाधान भी करते हैं | ऐसे शिक्षक – शिक्षिकाओं के कारण ही विद्यालय का परीक्षा परिणाम हर वर्ष बढ़िया आता है | हर बच्चे के माता –पिता विद्यालय के सभी गुरुजनों से अत्यंत प्रभावित एवं प्रसन्न रहते हैं | इसी कारण हर माता – पिता अपने बच्चों को इसी विद्यालय में पढ़वाना चाहते हैं | विद्यालय की और भी अन्य खूबियाँ हैं | मेरे विद्यालय में चार पुस्तकालय हैं  जिसमें  कक्षाओं के आधार पर पुस्तकें मिलती हैं | यहाँ खेल का मैदान बहुत बड़ा है ,यहाँ का तरणताल एकदम साफ़-सुथरा रहता है | अन्य सभी खेलों को सिखाने की भी अच्छी व्यवस्था है | घुड़सवारी करने और सीखने का यहाँ अलग ही मजा आता है | इन्हीं सब खूबियों के कारण ही मेरा विद्यालय देश के प्रसिद्ध विद्यालयों में नम्बर एक पर है | मुझे मेरा विद्यालय अत्यंत प्रिय है |
अनुच्छेद पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

प्रश्न १- गद्यांश में किस विद्यालय की चर्चा की गई है ?
प्रश्न २- विद्यालय के बारे में जानकारी देने वाला स्त्रीलिंग है या पुल्लिंग , बताएँ ?
प्रश्न ३- विद्यालय में कितने पुस्तकालय हैं ?
प्रश्न ४-विद्यालय की किन्हीं दो विशेषताओं को लिखिए –
प्रश्न ५- पर्यायवाची शब्द लिखिए –
क-    अध्यापक , ख- शिक्षिका
प्रश्न ६- बहु वचन बताएँ –
क-    कक्षा , ख- पुस्तक  
प्रश्न ७-  दो संयुक्ताक्षर शब्द लिखिए
प्रश्न ८ – दो संज्ञा शब्द लिखिए
प्रश्न ९- दो सर्वनाम शब्द लिखिए –
प्रश्न १० – गद्यांश को आप क्या नाम देना चाहेंगे ?
उत्तर पत्र
उत्तर १ – सरस्वती विद्यामंदिर |
उत्तर २- पुल्लिंग
उत्तर ३ – चार
उत्तर ४ – १- बड़ा है , २- यहाँ लगभग सभी खेलों की व्यवस्था है |
उत्तर ५ – अध्यापिका , शिक्षक
उत्तर ६ -  कक्षाएँ , पुस्तकें
उत्तर ७ – अत्यंत , सरस्वती
उत्तर ८ – १ - सरस्वती      २ – विद्यामंदिर
उत्तर  ९ – मुझे , मेरा

उत्तर १० – मेरा विद्यालय 

Wednesday, 7 June 2017

                                अपठित २० 

आज की भागती दौड़ती जिन्दगी से मुस्कराहट तो न जाने कहाँ खो गई है | कुछ दशक पहले तक तो लोग एक-दूसरे को देखते ही एक सुंदर सी मुस्कराहट के साथ अभिवादन करते थे, किन्तु आज दशा यह है कि किसी पहचान वाले को देखते ही व्यस्तता को मुखौटा लगाकर अभिवादन की प्रक्रिया से स्वयं को बचाकर सुरक्षित निकलना ही बहादुरी का कार्य समझते हैं | जबकि मुस्कराहट एक ऐसी औषधि है जो मनुष्य को बिना किसी दाम के मिली है ,  यह उसके शारीरिक एवं मानसिक रोगों का उपचार करने में पूर्णतः सक्षम है | जो व्यक्ति मुस्कराकर दिन की शुरुआत करता है वह निश्चय ही सारे दिन ऊर्जावान रहता है , वह बिना किसी तनाव के सारे कार्य कुशलता से पूर्ण कर पुनः अगले दिन के लिए नए कार्यों को पूरा करने की कुशल रणनीति बना , निश्चिन्त हो सो जाता है | पुनः नई ऊर्जा ,नए विशवास के साथ दिन का शुभारम्भ करता है और सफलता प्राप्त करता है | ऐसे व्यक्ति का सानिध्य सभी लोग चाहते हैं , उसकी एक छोटी सी मुस्कराहट के कारण ज्यादा से ज्यादा लोग उसके समीप आने का प्रयास करते हैं | ठीक इसके विपरीत अनायास ही खीजने वाले व्यक्ति से हर कोई दूरी बनाना पसंद करता है , हर कोई उससे बचना चाहता है | पुरानी कहावत है कि प्रसन्न वदन के दर्शन मात्र से ही समस्त कार्य पूर्ण हो जाते हैं , अतः हमारा प्रयास होना चाहिए कि स्वयं प्रसन्न रहकर दूसरों को भी खुशियाँ बांटे | सचमुच मुस्कराहट अनमोल होती है एक छोटी सी मुस्कराहट से बड़े-बड़े कार्य सहजता से सम्पन्न हो जाते हैं | कहते हैं न कि हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होए | तो अब तो आप समझ ही गए होंगे कि एक छोटी सी मुस्कराहट कितने काम की है | तो चलिए आज से बल्कि अभी से मुस्कराने की आदत डालिए खुद स्वस्थ रहकर लोगों में खुशियाँ बाँटिए |  

उपरोक्त गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
प्रश्न-१ प्रस्तुत गद्यांश जीवन की किस अनमोल औषधि के बारे में बताता है ? स्पष्ट करें |
प्रश्न – २ गद्यांश में किस कहावत की चर्चा की गई है , उस कहावत को लिखें |
प्रश्न ३ –अधिक ऊर्जावान रहने के लिए किस उपाय को बताया है , गद्यांश से ढूँढकर लिखिए-
प्रश्न ४- अभिवादन करते समय हमें अपने मुख पर कैसे भाव रखने चाहिए ?
प्रश्न ५ – गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए-



उत्तर-पत्र
उत्तर १- गद्यांश में मुस्कराहट के बारे में बताया है कि मुस्कराहट एक ऐसी औषधि है जो मनुष्य को बिना किसी दाम के मिली है ,  यह उसके शारीरिक एवं मानसिक रोगों का उपचार करने में पूर्णतः सक्षम है |
उत्तर २- गद्यांश में हींग लगे न फिटकरी रंग भी चोखा होए कहावत की चर्चा की गई है , जिससे हमें मुस्कराहट की कीमत का पता लगता है कि मुस्कराहट अनमोल होती है और यह मनुष्य के अंतःकरण से निकलकर लोगों पर अपना स्थायी प्रभाव छोडती है तथा बिना किसी दाम के अपने आस-पास के वातावरण को मनभावन बना देती है |
उत्तर ३- ऊर्जावान रहने के लिए हमें दिन का आरम्भ मुस्कराहट के साथ करना चाहिए |
उत्तर ४ – अभिवादन करते समय हमें अपने मुख पर प्रसन्नता के भाव रखने चाहिए |
प्रश्न ५ – गद्यांश का उचित शीर्षक है “ मुस्कराहट “












































Tuesday, 11 April 2017

                                                        अपठित १९
एक  बार कोई  महात्मा तपस्या में लीन थे | उनके समीप से एक चोर गुजर रहा था | चोर ने महात्मा जी को ध्यानावस्था में देखा तो उसे एक शरारत सूझी | उसने चोरी की हुई एक तलवार महात्मा जी के समीप रख दी और वहाँ से भाग गया | तपस्या पूरी होने पर महात्मा जी ने आँखें खोली तो पास में रखी तलवार को देखा | महात्मा जी दुनिया से बेखबर रहने वाले बिलकुल सीधे -सच्चे संत थे | उन्होंने पहले कभी तलवार नहीं देखी थी | उन्होंने तलवार उठाई तो तलवार छिटककर एक पौधे को काटती हुई दूर जा गिरी | महात्मा जी ने कटे पौधे को देखा तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ | अब मजे -मजे में उन्होंने हर चीज को काटना शुरू कर दिया | लोग बड़े परेशान हो गए , यहाँ तक कि देवतागण भी दुखी होकर ईश्वर से प्रार्थना करे लगे कि किसी प्रकार महात्मा जी को रोका जाए | भगवान ने सबकी प्रार्थना सुनी और सोते हुए महात्मा जी के पास से तलवार उठा ली और उसके स्थान पर एक कलम रख दी | सुबह जागने पर महात्मा जी ने कलम को देखा तो कलम एक अलोकिक प्रकाश से जगमगा रही थी | उन्होंने उसे उठाया और पत्ते पर रखा उस पर कुछ शब्द उभर आये | अब तो महात्मा जी की ख़ुशी का ठिकाना न रहा और वे भगवत भक्ति की रचनाएं करने लगे | महात्मा जी ने जो कुछ लिखा वह अदभुत था , उसे पढ़कर लोग उनकी जय-जयकार करने लगे |
उपरोक्त गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों  के सही उत्तर चुनिए  -

प्रश्न १-तपस्या कौन कर रहा था ?
क - राजा                   ख -मुनि                  ग-चोर                    घ- महात्मा

प्रश्न २- महात्मा जी के पास चोर ने क्या रखा ?
क-तलवार                  ख-कलम            ग - कपड़े             घ- भोजन

प्रश्न ३-महात्मा जी कैसे स्वभाव के थे ?
क-क्रोधी                    ख-नम्र               ग-चालक                  घ-सीधे-सच्चे संत

प्रश्न ४-महात्मा जी के हाथ से तलवार छूटने  पर क्या हुआ ?
क- शेर के पैर पर गिरी                                         ख- महात्मा जी के हाथ पर गिरी              

ग- एक पौधे को काटती हुई दूर जा गिरी                 घ-उड़ती चिड़िया के पंखों को काटती गिर पड़ी

प्रश्न ५- गद्यांश में आई चार जातिवाचक संज्ञा छांटकर लिखिए-
१-                                       २-                                 ३-                                   ४-

प्रश्न ६-गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए-

प्रश्न ७- तलवार पाकर महात्मा जी ने क्या किया ?

प्रश्न ८ -महात्मा जी के व्यवहार से कौन-कौन दुखी हुआ ?

प्रश्न ९- प्रार्थना सुनकर भगवान ने क्या किया ?

प्रश्न १०- कलम पाकर महात्मा जी के व्यवहार में क्या परिवर्तन आया ?

Friday, 7 April 2017



                              अपठित १८ 



भारतीय संस्कृति की अपनी अनेक  विशेषताएं हैं | साँझी संस्कृति के कारण भारत को विश्व में महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है | अनेक भाषाओँ और बोलियों के होते हुए भी भारतवासी एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं | विविधता में एकता भारत की अस्मिता की पहचान है | आज सम्पूर्ण विश्व में प्रेम और सदभाव की कमी खटक रही है | मानव-मानव के प्रति कठोर होता जा रहा है | यदि देख जाए तो आज वसुधैव कुटुम्बकम की नीति का पालन करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए | संगठन और प्रेम में जितनी शक्ति होती है उतनी किसी अन्य चीज में नहीं है | व्यक्ति के  सुख में सुख का अनुभव और दुःख में दुःख का अनुभव करना ही मानवता की सच्ची पहचान है |

उपरोक्त गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न-१ भारतीय संस्कृति की क्या विशेषताएँ हैं ? स्वविवेक से उत्तर दें |

प्रश्न २-गद्यांश में आये किन्ही दो संयुक्ताक्षरों को लिखिए |

प्रश्न ३- इन शब्दों के विलोम शब्द लिखिए-

क -प्रेम ↔                      ख     एकता

प्रश्न ४- भारत में बोली जाने वाली किन्हीं दो बोलियों के नाम लिखिए |

प्रश्न ५ –“ मानव - मानव के प्रति कठोर होता जा रहा है “ कैसे ? आज की विश्व की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उत्तर दें |

Tuesday, 14 March 2017

                              अपठित गद्यांश १७ 
भारत में ही नहीं बल्कि भारत से बाहर भी राम लोकप्रिय हैं | राम के जीवन पर आधारित न जाने कितने ही ग्रन्थ भारत में तो मिल ही जाएँगे अपितु विश्वभर में भी इनकी संख्या कम नहीं है | राम एक लोकप्रिय जननायक हैं | भारत में तो जनमानस के प्राण हैं | राम के जीवन की  एक-एक घटना बड़ी  ही महत्त्वपूर्ण है , इसीलिए तो हर वर्ष भारत में रामलीला का आयोजन किया जाता है | राम कथा का पाठ होता है | राम जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से आयोजित किया जाता है | हर बालक में माँ को राम-कृष्ण की छवि दिखती है | हर माँ का सपना होता है कि उनका बेटा राम जैसा आज्ञाकारी हो | राम की सौगंध लेकर स्वयं को निर्दोष सिद्ध करने की परम्परा भारत में प्रचलित है | एक दूसरे को अभिवादन करने के लिए राम-राम कहा जाता है | एक आदर्श चरित्र के रूप में राम की स्वीकृति भारत के बाहर भी है | रामलीलाएँ दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी एशिया के लगभग सभी देशों में किसी न किसी रूप में दिखाई जाती हैं | कहीं कठपुतली के रूप में तो कहीं नृत्य-नाटिका के रूप में | इंडोनेशिया में सेन्द्रातारी रामायण बड़ी लोकप्रिय है | इंडोनेशिया के जावा के प्रम्बनान मंदिर में राम की यह लीला तक़रीबन साल भर चलती है | यह रामकथा पर आधारित एक नृत्य-नाटिका (बैले-डांस) है | इसमें एक समय में कलाकारों की संख्या दो सौ से भी ज्यादा हो जाती है | कभी-कभी आठ सौ तक हो जाती है | यहाँ भी भारत की भाँति सीता-हरण ,मारीचि वध आदि दृश्य दिखाए जाते हैं | फ्रा लाक फ्रा राम नाम का महाकाव्य बर्मा और चीन के बीच पड़ने वाले देश लाओस का राष्ट्रीय महाकाव्य है | इसकी कहानी भारतीय रामकथा से बहुत मिलती-जुलती है | फिजी में होने वाली रामलीला का वाल्मीकि रामायण एवं रामचरित मानस के जैसा  ही मंचन होता है | रामत्जांद्रे की लीला में डच प्रभाव के कारण सूरीनाम में भगवान् राम रामत्जांद्रे हो जाते हैं और सीता सियेता हो जाती हैं | रामायण के सभी पात्र जब  हिंदी और डच मिश्रित भाषा बोलते हैं तो एक अद्भुत वातावरण बन जाता है | सच ही कहा गया है कि राम हर जगह किसी न किसी रूप में व्याप्त हैं |
अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
प्रश्न १- राम का सम्बन्ध मुख्य रूप से किस देश से है ?
प्रश्न २- रामायण महाकाव्य की रचना किस कवि द्वारा की गई ?
प्रश्न ३- फ्रा लाक फ्रा राम  किस देश का राष्ट्रीय महाकाव्य है ?
प्रश्न ४- सेन्द्रतारी रामायण के बारे में तीन-चार  वाक्य लिखिए |
प्रश्न ५-इस गद्यांश को आप क्या नाम देना चाहते हैं ?
प्रश्न ६- डच भाषा के प्रभाव के कारण राम-सीता के बदले नाम क्या हैं तथा किस देश में इसका आयोजन होता है ? 
  
उत्तर-पत्र
    उत्तर-१ राम का सम्बन्ध मुख्य रूप से भारत से है |
उत्तर-२ रामायण महाकाव्य की रचना महाकवि वाल्मीकि द्वारा की गई |
उत्तर-३ फ्रा लाक फ्रा राम नाम का महाकाव्य बर्मा और चीन के बीच पड़ने वाले देश लाओस का राष्ट्रीय महाकाव्य है |
उत्तर-४ इंडोनेशिया के जावा के प्रम्बनान मंदिर में सेन्द्रतारी रामायण पर आधारित राम की यह लीला तक़रीबन साल भर चलती है | यह रामकथा पर आधारित एक नृत्य-नाटिका (बैले-डांस) है | इसमें एक समय में कलाकारों की संख्या दो सौ से भी ज्यादा हो जाती है | कभी-कभी आठ सौ तक हो जाती है | यहाँ भी भारत की भाँति सीता-हरण ,मारीचि वध आदि दृश्य दिखाए जाते हैं |

उत्तर-५ इस गद्यांश को मैं रामलीला नाम देना चाहता /चाहती हूँ |
उत्तर-६ रामत्जांद्रे की लीला में डच प्रभाव के कारण सूरीनाम में भगवान् राम रामत्जांद्रे हो जाते हैं और सीता सियेता हो जाती हैं |




Thursday, 9 March 2017

                                अपठित १६ 


मनुष्य के जीवन में लक्ष्य का होना बहुत आवश्यक है | लक्ष्य के बिना जीवन दिशाहीन तथा व्यर्थ ही है | एक बार एक दिशाहीन युवा आगे बढ़े जा रहा था ,राह  में महात्मा जी की कुटिया देख रूककर महात्मा जी से पूछने लगा कि यह रास्ता कहाँ जाता है | महात्मा जी ने पूछा “ तुम कहाँ जाना चाहते हो “| युवक ने कहा “ मैं नहीं जानता मुझे कहाँ जाना है “| महात्मा जी ने कहा “जब तुम्हें पता ही नहीं है कि तुम्हें कहाँ जाना है , तो यह रास्ता कहीं भी जाए ,इससे तुम्हें क्या फर्क पड़ेगा “| कहने का मतलब है कि बिना लक्ष्य के जीवन में इधर-उधर भटकते रहिये कुछ भी प्राप्त नहीं कर पाओगे | यदि कुछ करना चाहते तो पहले अपना एक लक्ष्य बनाओ और उस पर कार्य करो| अपनी राह स्वयं बनाओ | वास्तव में जीवन उसी का सार्थक है जिसमें परिस्थितियों को बदलने का साहस है | गांधीजी कहते थे कुछ न करने से अच्छा है ,कुछ करना | जो कुछ करता है वही सफल-असफल होता है | हमारा लक्ष्य कुछ भी हो सकता है , क्योंकि हर इंसान की अपनी-अपनी क्षमता होती है और उसी के अनुसार वह लक्ष्य निर्धारित करता है | जैसे विद्यार्थी का लक्ष्य है सर्वाधिक अंक प्राप्त करना तो नौकरी करने वालों का लक्ष्य होगा पदोन्नति प्राप्त करना | इसी तरह किसी महिला का लक्ष्य आत्मनिर्भर होना हो सकता है | ऐसा मानना है कि हर मनुष्य को बड़ा लक्ष्य बनाना चाहिए किन्तु बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाने चाहिए | जब हम छोटे लक्ष्य प्राप्त कर लेते हैं तो बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने का हममें आत्मविश्वास आ जाता है | स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जीवन में एक ही लक्ष्य बनाओ और दिन-रात उसी के बारे में सोचो | स्वप्न में भी तुम्हें वही लक्ष्य दिखाई देना चाहिए , उसे पूरा करने की एक धुन सवार हो जानी चाहिए | बस सफलता आपको मिली ही समझो | सच तो यह है कि जब आप कोई काम करते हैं तो यह जरुरी नहीं कि सफलता मिले ही लेकिन असफलता से भी घबराना नहीं चाहिए | इस बारे में स्वामी विवेकानंद जी कहते हैं कि हजार बार प्रयास करने के बाद भी यदि आप हार कर गिर पड़ें तो एक बार पुनः उठें और प्रयास करें | हमें लक्ष्य प्राप्ति तक स्वयं पर विश्वास रखना चाहिए |


अपठित को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

प्रश्न १ युवक कहाँ जा रहा था ? राह में उसे कौन मिला ?

प्रश्न २- युवक तथा महात्मा जी के संवाद को अपने शब्दों में लिखें |

प्रश्न ३- विद्यार्थी एवं किसी महिला का क्या लक्ष्य हो सकता है ?

प्रश्न ४-मनुष्य का लक्ष्य कैसा होना चाहिय तथा उसके लिए उसके क्या प्रयास होने चाहिए ?

प्रश्न ५ -लक्ष्य प्राप्ति के बारे में विवेकानंद जी के क्या विचार हैं ?

उत्तर पत्र

उत्तर १- एक युवक दिशाहीन चला जा रहा था | रास्ते में उसे कुटिया में महात्मा जी मिले |

उत्तर २- युवक ने महात्मा जी से पूछा कि यह रास्ता कहाँ जाता है | महात्मा जी ने युवक से प्रश्न किया कि तुम्हें कहाँ जाना है | युवक ने कहा कि उसे नहीं पता कि उसे कहाँ जाना है |

उत्तर ३-विद्यार्थी का लक्ष्य सर्वाधिक अंक प्राप्त करना तथा किसी महिला का लक्ष्य आत्मनिर्भर बनना हो सकता है |

उत्तर ४ – मनुष्य का लक्ष्य हमेशा बड़ा होना चाहिए और बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए छोटे-छोटे लक्ष्य बनाकर उसकी प्राप्ति के लिए प्रयास करा चाहिए | जब हम छोटे लक्ष्य प्राप्त कर लेते हैं तो हममें आत्मविश्वास आ जाता है |

उत्तर ५-लक्ष्य प्राप्ति के बारे में स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि हजार बार प्रयास करने के बाद भी यदि आप हार कर गिर पड़ें तो एक बार पुनः उठें और प्रयास करें | हमें लक्ष्य प्राप्ति तक स्वयं पर विश्वास रखना चाहिए |
  


Friday, 3 March 2017

                                       अपठित १५ 


जैसे हिन्दुओं का त्यौहार दीपावली कई दिन का त्यौहार होता है ,उसी प्रकार ईसाइयों का त्यौहार क्रिसमस भी एक दिन का नहीं बल्कि कई दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार है |इसकी तैयारियाँ तो नौ दिन पहले शुरू हो जाती हैं |इसे नोवेना कहते हैं |इनमें हर दिन नई-नई प्रार्थनाएँ की जाती हैं| हर रात एक मोमबत्ती जलाकर यानि हनुक्का मनाया जाता है | इस प्रकार यह त्यौहार नए साल तक मनाया जाता है |क्रिसमस पर गाए जाने वाले कैरोल की शुरुआत हजारों साल पहले यूरोप में हुई थी , तब ये क्रिसमस कैरोल नहीं बल्कि काव्य कथा होती थी | जिनके द्वारा लोग मदर मैरी और जीसस की कहानियाँ बताते थे | पहले क्रिसमस को मनाने की तारीख को लेकर काफी मतभेद थे, किन्तु रोम के बिशप जूलियन प्रथम ने सन ३५० में नए कैलेंडर के हिसाब से २५ दिसम्बर को क्रिसमस मनाने की घोषणा कर दी | तब से यह सिलसिला जारी है|दुनिया भर में क्रिसमस मनाने का सबका अपना-अपना अलग-अलग तरीका है | फ़्रांस में छह दिसम्बर से ही उत्सव शुरू हो जाता है | बाजार सज जाते हैं ,चौकलेट और तोहफों की भरमार होती है |ब्रिटेन में बच्चे गिफ्ट की लिस्ट बना कर आग में जलाते हैं | यह माना जाता है कि   यह कागज जलकर चिमनी से होता हुआ नॉर्थ पोल तक जाता है | जहाँ सांता की गिफ्ट फैक्ट्री है | जर्मनी में बच्चे सांता को बुलाने के लिए विश लिस्ट को रंग-बिरंगा सजाते हैं | वहीँ स्पेन में तोहफों की आस में बच्चे मोज़े नहीं बल्कि जूते टाँगते हैं | फिलिपीन्स के लोग कागज और बांस से बनी तारे के आकार की लालटेन से सजावट करते हैं | बच्चों को क्रिसमस ट्री सजाने का तोहफा १९वीं शताब्दी में मिला था | सब सोचते हैं कि क्या सच में सांता और उसके रेनडियरस नॉर्थ पोल से आते हैं | बात यह है कि चौथी शताब्दी में टर्की के एक बिशप थे संत निकोलस वे पता लगाते थे कि किस बच्चे ने अच्छा कार्य किया है , जिसे उपहार दिया जाए | इसके बाद ये चोगा पहनकर निकलते थे और बच्चों को उपहार देते थे | इस प्रकार सांता क्लॉज खूब प्रसिद्ध हो गए |

अपठित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

प्रश्न १- हिन्दुओं के प्रसिद्ध त्यौहार का नाम बताइए |

प्रश्न २- नोवेना क्या है ? बताएँ |

प्रश्न ३-कैरोल की शुरुआत कहाँ से हुई पहले इसका क्या रूप था ?

प्रश्न ४ - ब्रिटेन में बच्चे क्रिसमस कैसे मनाते हैं ?

प्रश्न ५- उपरोक्त अनुच्छेद का उचित शीर्षक लिखिए |

उत्तर पत्र

उत्तर १ – हिन्दुओं का प्रसिद्ध त्यौहार दीपावली है |

उत्तर २-क्रिसमस की तैयारियाँ नौ दिन पहले आरम्भ हो जाती हैं , इसमें हर दिन नई -नई प्रार्थनाएँ की जाती हैं | इसे नोवेना कहते हैं |

उत्तर ३-कैरोल की शुरुआत यूरोप से हुई | पहले यह काव्य-कथा होती थीं | जिनके द्वारा लोग मदर मैरी तथा जीसस की कहानियाँ बताते थे |

उत्तर ४- ब्रिटेन में बच्चे गिफ्ट की लिस्ट बना कर आग में जलाते हैं | यह माना जाता है कि   यह कागज जलकर चिमनी से होता हुआ नॉर्थ पोल तक जाता है | जहाँ सांता की गिफ्ट फैक्ट्री है |


उत्तर ५- क्रिसमस का त्यौहार |