Tuesday, 14 May 2019

                                                अपठित गदयांश ४२ 
हम कार्यरत हैं और उस कार्य में सफलता नहीं मिलती है तो हम हताश होकर कह उठते हैं कि ऐसा होना मेरे भाग्य में नहीं थाअतः हमारा यह कार्य पूर्ण नहीं हुआ | हम भाग्य को दोष देने लगते हैं और भाग्य को ही सर्वोपरि रखते हैं जबकि कुछ लोग कर्म को ही प्रधान मानते हैं, वे कहते हैं कि कर्म से बढ़कर कुछ नहीं | एक पौराणिक प्रसंग के अनुसार एक बार नारद जी भगवान श्री हरि के पास वैकुंठधाम गए | श्री हरि ने उन्हें आया देख उनका प्रणाम स्वीकार कर आने का कारण पूछा | बड़े विचलित थे नारद जी  उन्होंने कहा प्रभु ऐसा क्यों होता है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों का भला नहीं होता जबकि बुरे कर्म करने वालों का भला होता है’| श्री हरि ने कहा- ऐसा नहीं है, देवर्षि! जो होता है सब नियति के कारण होता है, आपने ऐसा क्या देख लिया’| तब मानस पुत्र ने भगवान विष्णु से कहा “मैंने आज जंगल में दल-दल में फँसी एक गाय को देखा , उसको बाहर निकालने में कोई सहायता नहीं कर रहा था, एक चोर वहाँ से गुजरा  गाय को बाहर निकालने के बजाय वह उसके ऊपर पैर रख कर ही चला गया और इतना ही नहीं प्रभु आगे जाकर उसे स्वर्ण मुद्राओं से भरी एक थैली मिली | थोड़ी देर में वहाँ से एक साधु गुजरा उसने गाय को बाहर निकाला किन्तु यह क्या भगवन वह आगे जाकर एक गड्ढे में गिर गया | यह कौन सा न्याय है ? नारायण !” | तब लक्ष्मीपति ने देवर्षि से कहा , जिस चोर को स्वर्ण मुद्राएँ मिली उसकी किस्मत में बड़ा खजाना था, किन्तु इस पाप के कारण उसे नहीं मिला, जबकि साधु ने पुण्य करके अपनी मृत्यु को टाल दिया और  गड्ढे में गिरकर उसकी मृत्यु छोटी सी चोट में परिवर्तित हो गई | अब तो आपको यह विश्वास हो गया होगा कि मनुष्य के कर्मों से ही उसके भाग्य की रूपरेखा बनती है | अतः हर मनुष्य को केवल अपना कर्म करना  चाहिए , भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए | जैसा कि श्री कृष्ण द्वारा गीता में भी कहा गया है कर्मण्यकाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन | सच में कर्म हमारे हाथों की लकीरों को बदल देते हैं  |
प्रश्न १ कर्मण्यकाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन यह उक्ति किसने कही है , तथा यह किस भाषा में है ?

प्रश्न २ मनुष्य को सफलता न मिले तो वह किसे दोष देता है ?

प्रश्न ३ इस गदयांश में किसके बीच वार्तालाप हो रही है ? उनके नाम लिखिये -

प्रश्न ४ निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिये -

न्याय                 पाप                  मृत्यु                 बुरे


प्रश्न ५ निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची लिखिये –

नारद               हरि

प्रश्न ६ वाक्य पूरा कीजिए- मनुष्य के     से ही उसके        की रूपरेखा बनती है

प्रश्न ७ निम्नलिखित शब्दों में अ उपसर्ग लगाकर विलोम शब्द बनाइए –

सत्य                 सफलता               विश्वास               पूर्ण

प्रश्न ८ पूर्व ज्ञान के आधार पर बताइए कि श्री कृष्ण ने गीता किसे सुनाई थी ?

प्रश्न ९ हमें पशुओं के प्रति कैसा व्यवहार करना चाहिए ?

प्रश्न १० गदयांश को उचित शीर्षक दीजिए -

Thursday, 9 May 2019

किसी भी देश की पहचान उस देश के नागरिकों से होती है | यदि देश के नागरिक सभ्य, सुसंस्कृत तथा देश के प्रति समर्पित हैं तो उस देश की उन्नति निश्चित समझो | अतः सभी मनुष्यों का दायित्व  है कि देश एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से करें | हम अपने लिए तो सब कुछ चाहते हैं किन्तु करना कुछ नहीं चाहते | हमारे लिए अधिकार सर्वोपरि हैं और हम अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाते हैं | हम अपने अधिकारों के लिए धरना देते हैं , दूसरों को कोसते हैं , तरह-तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं | किन्तु अपने कर्तव्यों को पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं | प्रत्येक नागरिक में यदि देश के प्रति सकारात्मक सोच हो तो ऐसा देश उन्नति के पथ पर अग्रसर रहता है | कई बार हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सामाजिक हित को अनदेखा कर देते हैं | इस प्रवृत्ति के कारण देश की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है | इससे व्यक्ति का तथा समाज का समुचित विकास नहीं हो पाता और ऐसा राष्ट्र आदर्श राष्ट्र नहीं बन पाता | कुछ छोटी-छोटी बातों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाना , शौचालयों का प्रयोग करना ,वैवाहिक आदि कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर का मंद आवाज में प्रयोग करना , प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करना असहायों की सहायता करना , रिश्वतख़ोरी से दूर रहना | ऐसे न जाने कितने कर्तव्य हैं जिनका पालन कर हम देश की प्रगति में सहयोग कर सकते हैं | हमें याद रखना चाहिए , जब-जब देश के नागरिकों ने उपरोक्त दुर्गुणों को अपनाया उन्हें गुलामी की जंजीरों ने जकड़ा और जब हम एकजुट हुए अपने कर्तव्यों का पालन किया , पूरा आसमान हमने अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया |
अपठित गदयांश को ध्यान से पढ़कर उत्तर दीजिये –
प्रश्न १ गदयांश का उचित शीर्षक बताइये |
प्रश्न २ कैसा देश उन्नति के पथ पर अग्रसर रहता है ?
प्रश्न ३ गद्याश में बताए गए दुर्गुणों में से कोई दो लिखिए |
प्रश्न ४ किन परिस्थितियों में देश गुलाम बना ?
प्रश्न ५ पूरा आसमान हमारी मुट्ठी में कब बंद होता है ?
प्रश्न ६ गदयांश में प्रयुक्त उपसर्ग ढूंढकर लिखिए-
प्रश्न ७ गदयांश में प्रयुक्त प्रत्यय ढूंढकर लिखिए-
प्रश्न ८ निम्न शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –
१ हित - २ देश
प्रश्न ९ निम्न शब्द के दो  पर्यायवाची शब्द लिखिए –
आसमान १  २
प्रश्न १० गदयांश में प्रयुक्त योजक शब्द ढूंढकर लिखिए -
किसी भी देश की पहचान उस देश के नागरिकों से होती है | यदि देश के नागरिक सभ्य, सुसंस्कृत तथा देश के प्रति समर्पित हैं तो उस देश की उन्नति निश्चित समझो | अतः सभी मनुष्यों का दायित्व  है कि देश एवं समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी से करें | हम अपने लिए तो सब कुछ चाहते हैं किन्तु करना कुछ नहीं चाहते | हमारे लिए अधिकार सर्वोपरि हैं और हम अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाते हैं | हम अपने अधिकारों के लिए धरना देता हैं , दूसरों को कोसते हैं , तरह-तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगाते हैं | किन्तु अपने कर्तव्यों को पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं | प्रत्येक नागरिक में यदि देश के प्रति सकारात्मक सोच हो तो ऐसा देश उन्नति के पथ पर अग्रसर रहता है | कई बार हम अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए सामाजिक हित को अनदेखा कर देते हैं | इस प्रवृत्ति के कारण देश की प्रगति अवरुद्ध हो जाती है | इससे व्यक्ति का तथा समाज का समुचित विकास नहीं हो पाता और ऐसा राष्ट्र आदर्श राष्ट्र नहीं बन पाता | कुछ छोटी-छोटी बातों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैलाना , शौचालयों का प्रयोग करना ,वैवाहिक आदि कार्यक्रमों में लाउडस्पीकर का मंद आवाज में प्रयोग करना , प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश न करना असहायों की सहायता करना , रिश्वतख़ोरी से दूर रहना | ऐसे न जाने कितने कर्तव्य हैं जिनका पालन कर हम देश की प्रगति में सहयोग कर सकते हैं | हमें याद रखना चाहिए , जब-जब देश के नागरिकों ने उपरोक्त दुर्गुणों को अपनाया उन्हें गुलामी की जंजीरों ने जकड़ा और जब हम एकजुट हुए अपने कर्तव्यों का पालन किया , पूरा आसमान हमने अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया |
अपठित गदयांश को ध्यान से पढ़कर उत्तर दीजिये –
प्रश्न १ गदयांश का उचित शीर्षक बताइये |
प्रश्न २ कैसा देश उन्नति के पथ पर अग्रसर रहता है ?
प्रश्न ३ गद्याश में बताए गए दुर्गुणों में से कोई दो लिखिए |
प्रश्न ४ किन परिस्थितियों में देश गुलाम बना ?
प्रश्न ५ पूरा आसमान हमारी मुट्ठी में कब बंद होता है ?
प्रश्न ६ गदयांश में प्रयुक्त उपसर्ग ढूंढकर लिखिए-
प्रश्न ७ गदयांश में प्रयुक्त प्रत्यय ढूंढकर लिखिए-
प्रश्न ८ निम्न शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –
१ हित - २ देश
प्रश्न ९ निम्न शब्द के दो  पर्यायवाची शब्द लिखिए –
आसमान १  २
प्रश्न १० गदयांश में प्रयुक्त योजक शब्द ढूंढकर लिखिए -

Friday, 3 May 2019



अपठित 40


गर्मियों की छुट्टियाँ आरंभ होने वाली हैं | छुट्टियाँ ही ऐसा समय होता है जब बच्चे हों या बड़े सभी अपने-अपने अधूरे शौक या फिर अधूरे कार्य पूरे करने की योजना बनाकर उन कार्यों को पूरा कर मंजिल तक पहुँचते हैं | मेरे नन्हें दोस्तों आपने भी कुछ विशेष योजनाएँ बनाई होंगी अगर नहीं तो आपके लिए कुछ खास है जिन्हें अपनाकर आप अपनी छुट्टियों का भरपूर आनंद उठा सकते हैं, कुछ नया सीखने के साथ ही बड़ों की प्रशंसा भी प्राप्त कर सकते हैं | बस आपको इतना ही करना है कि अपने मन को टटोलिए कि कहीं कुछ ऐसा तो नहीं जो आप बहुत समय से करना चाहते हैं और समयाभाव के कारण नहीं कर पा रहे हैं | ऐसे कार्यों की सूची बनाइए और प्राथमिकता के अनुसार कार्य करना शुरू कर दीजिए |
गर्मियों में दिन बहुत बड़े होते हैं अतः समय भी बहुत मिलता है और भूख भी बहुत लगती है | पानी की कमी न हो इसलिए खूब पानी पीजिए | नीबू-पानी बनाना सीखिये, स्वयं पीजिए और अपने दादा-दादी , माँ-पिताजी को भी पिलाइए | आप घर में आए अतिथियों को भी पिला सकते हैं | इस प्रकार आप अपने घर में सहयोग तो दे ही रहे हैं साथ में आत्मनिर्भर भी बन रहे हैं | इसी प्रकार आप घर के और भी छोटे-मोटे कार्य कर हर दिन कुछ न कुछ सीख सकते हैं | खाने-पीने की चीजें बनाना , घर की साज-सज्जा करना , बाज़ार से छोटा-मोटा सामान लाना, इन सब कार्यों से आपका आत्मविश्वास भी बढ़ता है | वृद्धों के साथ समय बिताइए , उनके अनुभवों को जानिए, उनसे किस्से-कहानियाँ सुनिए | ऐसा करने पर उनको जितनी खुशी मिलेगी उससे कहीं ज्यादा लाभ आपको मिलेगा | आपके ज्ञान के भंडार में वृद्धि होगी , जिसका समय आने पर आप सदुपयोग कर सकेंगे | प्रतिदिन कोई न कोई खेल खेलकर आप अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रख सकते हैं | जीवन में जब आप स्वस्थ रहेंगे तभी तो आप वह सब कुछ पा सकेंगे जो आप प्राप्त करना चाहते हैं | क्योंकि कहा भी गया है कि स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है |
अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
प्रश्न १ किसी भी कार्य को करने से पहले योजना क्यों बनाना चाहिए ?
प्रश्न २ गर्मियों में हमें अधिक समय क्यों मिलता है ?
प्रश्न ३ स्वविवेक से उत्तर दीजिए कि हमें गर्मियों में अधिक पानी क्यों पीना चाहिए ?
प्रश्न ४ आप इस अनुच्छेद को क्या नाम देना चाहेंगे ?
प्रश्न ५ अनुच्छेद से चार सन्युक्ताक्षर चुनकर लिखिए -
प्रश्न ६  अनुच्छेद से चार योजक चिन्ह वाले शब्द चुनकर लिखिए –
प्रश्न ७ अनुच्छेद से चार संज्ञा शब्द चुनकर लिखिए –
प्रश्न ८ अनुच्छेद से चार सर्वनाम शब्द चुनकर लिखिए –
प्रश्न ९ अनुच्छेद से चार विशेषण  शब्द चुनकर लिखिए –
प्रश्न १० अपने शब्दों में बताइए कि आपको अनुच्छेद में बताई गई बातें कैसी लगीं , इन बातों  को अपनाकर आपको क्या-क्या लाभ हुआ ?

Saturday, 26 January 2019



                            अपठित ३९
कहते हैं न कि “मन के हारे हार है मन के जीते जीत” अर्थात आप यदि आत्मविश्वास से भरपूर हैं तो जीत आपकी निश्चित है , जरा सा भी मन विचलित हुआ नहीं कि आपको हार ने जकड लिया | इसीलिए मनुष्य में आत्मविश्वास का होना अत्यंत आवशयक है | कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न हो यदि  आप में आत्मविश्वास है तो आप बिना विचलित हुए अपने कार्य को सहजता से पूरा कर लेंगे | मिसाइल मैन के नाम से विख्यात और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का बचपन काफी गरीबी में बीता | अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्हें अपने गृह नगर रामेश्वरम में अखबार तक बेचना पड़ा | एयरोनौटिकल इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता के साथ प्रसिद्धि प्राप्त करने वाले  डॉ कलाम एक फाइटर पायलट बनना चाहते थे , किन्तु उनका यह सपना साकार नहीं हो पाया क्योंकि वह वायुसेना में उपलब्ध आठ स्थानों में नौवें स्थान पर आए , लेकिन उन्होंने अपने इस सपने की असफलता और पारिवारिक मजबूरियों को अपने जीवन की बाधा नहीं बनने दिया | यदि वे अपने जीवन में इस असफलता से निराश होकर सफल होने की कोशिश नहीं करते तो आज पूरी दुनिया एक असाधारण रूप से प्रतिभाशाली वैज्ञानिक की हैरतअंगेज कामियाबियों से वंचित रह जाती | एक अन्य प्रसंग श्री हनुमान जी का भी ले सकते हैं कि रावण की लंका में प्रवेश कर , मुख्य भवनों को ध्वस्त कर उसके सामने जिस निडरता के साथ उपस्थित हुए , वह सब केवल उनका आत्मविश्वास ही था | सच है कि आत्मविश्वास मानव जीवन में सफलता की सबसे बड़ी सीढ़ी है | यह एक ऐसा अस्त्र है जिसके बल पर दुनिया के किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है | आत्मविश्वास से आत्मबल प्राप्त होता है और यही मनुष्य को लोहे से भी मजबूत बनाता है | अतः हम जीवन में कितनी ही कठिन परिस्थितियों और मुसीबतों में क्यों न घिर जाएँ हमें आत्मविश्वास नहीं छोड़ना चाहिए | 
प्रश्न १ डॉ एपीजे अब्दुल कलाम भारत के कौन थे ?
प्रश्न २ उन्होंने किस क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त की थी ?
प्रश्न ३ वे क्या बनना चाहते थे ?
प्रश्न ४ डॉ  कलाम के गृह नगर का क्या नाम है ?
प्रश्न ५ अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उन्हें क्या करना पड़ा ?
प्रश्न ६ मानव जीवन में सफलता की सीढ़ी क्या है ?
प्रश्न ७ आत्मबल हमें किससे प्राप्त होता है ?
प्रश्न ८ गद्यांश में कई प्रत्यय प्रयुक्त  हुए हैं | प्रत्यय वाले चार शब्द ढूंढ़कर लिखिए –
प्रश्न ९ कामयाबी शब्द का समानार्थी शब्द गद्यांश में दिया हुआ है , ढूंढ़कर लिखिए-
प्रश्न १० गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए -






Saturday, 19 January 2019

                                                             अपठित ३८
एक बार एक लकड़हारा जंगल में लकड़ियाँ काट रहा था कि अचानक उसका ध्यान भंग हुआ | उसने देखा कि दल-दल में एक खरगोश का बच्चा फंसा हुआ है तथा उसकी ओर कातर दृष्टि से देख रहा है | लकड़हारे को उस पर दया आ गई | उसने हाथ बढ़ाकर उसे दल-दल से बाहर निकाल लिया और उसे अपने साथ घर ले आया | लकड़हारे के घर में पहले से ही कुछ  खरगोश  थे , उसने इसे भी उनके साथ छोड़ दिया | उनमें एक छोटा खरगोश भी था | उस छोटे खरगोश ने नये मेहमान से शीघ्र ही मित्रता कर ली और उससे पूछा कि भाई तुम जहाँ रहते थे वहाँ किसी प्रकार का अभाव नहीं था फिर भी तुम इतने पतले-दुबले क्यों हो ? नया खरगोश पतला अवश्य था ,पर था बहुत बुद्धिमान | उसने कहा –“ भाई किसी के पास साधन होना ही सुख का प्रतीक नहीं है | सच्चा सुख तो निर्भय जीवन में है | जो प्राणी शारीरिक , मानसिक , सामाजिक और दैविक सभी प्रकार के भयों से मुक्त हो जाता है , वही सच्ची तरह से सुखी हो पाता है | भय चाहे किसी व्यक्ति का हो अथवा मृत्यु का उसके रहते कोई सुखी नहीं रह सकता है | वन में स्वतंत्रता अवश्य है , पर वहाँ भी सबल द्वारा निर्बल को सताए जाने का भय सदा व्याप्त रहता है | मैं जहाँ रहता था ,वहाँ एक सिंह भी रहता था , जो छोटे-छोटे जीवों को खा जाया करता था उसी के भय ने मुझे पनपने नहीं दिया | उसकी बातें सुन दूसरे खरगोश के बच्चे ने कहा मित्र ! स्वच्छन्दतावाद की सर्वत्र ऐसी दुर्गति होती है | देखो हम यहाँ कम साधनों में भी अनुशासन और सामाजिक मर्यादाओं में रहते हुए स्वस्थ और प्रसन्न हैं | यह कहते हुए उसने उससे प्रश्न किया यदि तुम सिंह का मुकाबला करते तो क्या जीत जाते ? खरगोश का बच्चा बोला यदि हम सब संगठित होते तो संभवतया जीत भी जाते , परन्तु हम लोगों की दुर्गति का कारण अलग-अलग रहना है | इसीलिए निर्भयता के साथ-साथ एकजुटता की भी आवश्यकता होती है | अकेला व्यक्ति कितना भी वीर हो सदैव विजयी नहीं हो सकता |
प्रश्न १ लकड़हारा जंगल में क्या कर रहा था , लकड़हारे का ध्यान किस कारण भंग हुआ ?
प्रश्न २ उसने खरगोश के बच्चे को कहाँ छोड़ दिया ?
प्रश्न ३ छोटे खरगोश ने नए खरगोश से क्या पूछा ?
प्रश्न ४ नए खरगोश ने सुख का आधार किसे बताया ?
प्रश्न ५ निम्नांकित शब्दों से उपसर्ग अलग कीजिए
  क  -    दुर्गति
   ख-   निर्बल
प्रश्न ६ निम्नांकित शब्दों से प्रत्यय  अलग कीजिए -
   क -   निर्भयता
   ख -   स्वच्छन्दतावाद
प्रश्न ७ निम्नांकित शब्दों में उपसर्ग लगाकर विलोम शब्द बनाइए
  क -     स्वस्थ
     ख प्रसन्न
प्रश्न ८ गद्यांश के आधार पर निम्नलिखित वाक्य को पूरा कीजिए
             के साथ-साथ               की भी आवश्यकता होती है |
प्रश्न ९ बताइए निम्नलिखित वाक्य किसने , किससे कहे |
यदि तुम सिंह का मुकाबला करते तो क्या जीत जाते ?
यदि हम सब संगठित होते तो संभवतया जीत भी जाते , परन्तु हम लोगों की दुर्गति का कारण अलग-अलग रहना है |
प्रश्न १० आप गद्यांश को क्या नाम देना चाहेंगे ?
  

Monday, 17 September 2018

                                                                  अपठित ३७
बात बहुत पुरानी है | एक राजा जंगल में आखेट ( शिकार ) के लिए गया | संध्या हो जाने के कारण वह रास्ता भटक गया | वह भूख-प्यास से व्याकुल था | दूर-दूर तक उसे कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था | वह विवशतावश निराश हो चला जा रहा था, कि अचानक उसे आशा की एक किरण दिखाई दी | एक झोंपड़ी से दीये का मंद-मंद प्रकाश झाँककर मानो राजा को आमंत्रित कर रहा था | राजा तेज़ी से झोंपड़ी की ओर बढ़ा | राजा ने झोंपड़ी का द्वार खटखटाया, तो एक वनवासी युवक ने द्वार खोला | राजा कुछ आग्रह करता उससे पहले ही वनवासी ने राजा की मनःस्थिति पढ़ ली और उसने राजा का आतिथ्य किया | शीतल जल से राजा की प्यास बुझी एवं साधारण किन्तु प्रेम से पकाए गए भोजन से राजा की क्षुधा शांत हुई | नवजीवन पाकर राजा अत्यंत प्रसन्न था | उसने युवक अपना को परिचय दिया एवं चन्दन वन उसे पुरस्कार स्वरूप दे दिया | वनवासी युवक चन्दन के महत्त्व से अनजान था | उसे ज्ञात न था कि चन्दन बहुत ही कीमती पेड़ होता है | उचित जानकारी के अभाव में वह प्रतिदिन पेड़ काटता, जलाता एवं उसका कोयला बनाकर शहर में बेच आता | इस प्रकार धीरे-धीरे सारे पेड़ समाप्त हो गए | केवल एक ही पेड़ शेष रहा | वर्षा होने के कारण आज वह पेड़ को जला नहीं पा रहा था अतः उसने पेड़ की कुछ बड़ी टहनियाँ काटीं और गठ्ठर बना कर शहर जा पहुँचा | व्यापारियों ने गठ्ठर देखा और उसकी बहुत अधिक कीमत लगाई | अधिक कीमत सुनकर युवक को बड़ा आश्चर्य हुआ | युवक ने उनसे अधिक कीमत के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि “यह चन्दन की लकड़ी है , यह अत्यंत मूल्यवान है | यदि तुम्हारे पास और हो तो बताओ हम तुम्हें उसका प्रचुर मात्रा में दाम देंगे” | यह सुनकर युवक ठगा सा रह गया | उसे अपनी मूर्खता पर अत्यंत दुःख हुआ | वह अपना सिर पकड़ कर बैठ गया और विचार करने लगा कि जानकारी के अभाव में उसने बहुमूल्य काष्ठ्सम्पदा को नष्ट कर दिया | एक वृद्ध सज्जन यह सब देख-सुन रहे थे | उन्होंने युवक को सांत्वना देते हुए समझाया कि ज्ञान के अभाव में ही ऐसा हुआ है | तुम्हारे पास जो एक वृक्ष बचा है उससे ही तुम आगे की योजना बनाकर लाभ उठा सकते हो |
इस समस्त घटना की जानकारी जब राजा को मिली तो राजा को अपने किए पर पश्चाताप हुआ और उसे समझ आया कि पारितोषक देते समय व्यक्ति की योग्यता पर विचार अवश्य कर लेना चाहिए | अयोग्य के हाथ में दिया गया धन बंदर के हाथों मोती की भांति ही नष्ट हो जाता है |
प्रश्न १ राजा किस कार्य से जंगल में गया था ?
प्रश्न २ झोंपड़ी से राजा को कौन आमंत्रित कर रहा था ?
प्रश्न ३ झोंपड़ी में कौन रहता था, उसने राजा के साथ कैसा व्यवहार किया?
प्रश्न ४ भोजन कैसा था?
प्रश्न ५ राजा ने युवक को पुरस्कार में क्या दिया, युवक ने पुरस्कार का क्या किया ?
प्रश्न ६ युवक को पेड़ से टहनियाँ क्यों काटनी पड़ी एवं उसका क्या परिणाम हुआ ?
प्रश्न ७ व्यापारियों की बातें सुनकर उसने क्या विचार किया
प्रश्न ८ गद्यांश में आए ‘ता’ प्रत्यय वाले दो शब्द लिखिए  तथा निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
१ बहुमूल्य                २ पश्चाताप
प्रश्न ९ निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए –
१ पेड़        २ पुरस्कार          ३ जंगल            ४ संध्या
प्रश्न १० स्वविवेक से बताइए कि एकमात्र शेष रहे पेड़ का सदुपयोग युवक ने किस प्रकार किया होगा ?




Friday, 14 September 2018

                                                                अपठित ३६
‘गजानन’ यानि कि ‘गणेश’ जी का अद्भुत स्वरूप देखकर मन में अनेकानेक प्रश्न उठते हैं, कि कैसा विचित्र रूप है फिर भी सभी देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाते है गणपति | क्यों ? भले ही रूप विचित्र हो, अंगों का आकार-प्रकार भिन्न हो, किन्तु अंग- प्रत्यंग की इस भिन्नता का समायोजन एक विशिष्ट उददेश्य एवं कला को दर्शाता है और वो कला है उत्तम प्रबंधन की | यथा - गणेश जी का चौड़ा मस्तक उनकी बुधिमत्ता तथा विवेकशीलता को दर्शाता है | हमें सन्देश देता है कि हम अपने मस्तिष्क में योजनाओं तथा विचारों को एकत्रित कर समग्रता के साथ विचार कर, मनन-चिंतन कर फिर उस दिशा में कार्य करें | गणेश जी की लम्बी सूँड संवेदन शक्ति का प्रतीक है, जो हर आने वाले संकट को दूर से ही पहचान लेती है | सूँड यानि ग्रहण करने की शक्ति | हमारी सजगता एवं अच्छे-बुरे की परख पर ही हमारी सफलता निर्भर करती है | गणेश जी के छोटे नेत्र सूक्ष्म किन्तु तीक्ष्ण दृष्टि रखने की प्रेरणा देते हैं | हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए प्रेरित करते हैं | विशाल सूप जैसे कान बताते हैं कि हमें कान का कच्चा नहीं होना चाहिए | हमें सबकी बातों को ध्यान पूर्वक सुनकर, जो केवल काम की हों उन्हें ही ग्रहण करना चाहिए शेष तुच्छ बातों को उसी प्रकार छोड़ देना चाहिए जैसे कि सूप केवल सार को ही रखता है और कचरे को उड़ा देता है | ऐसा करके हम सुखी एवं तनावमुक्त जीवन जी सकते हैं | गणपति जी  का एक दांत संकेत देता है कि जीवन में एक लक्ष्य होना चाहिए | लम्बा तथा मोटा पेट सभी बातों को पचा लेने की ओर इंगित करता है | यदि कोई अपनी बात, कोई रहस्य हमारे साथ साझा करता है तो हमें उसे अपने तक ही सीमित रखना चाहिए | यह मन्त्र हमारे जीवन की सफलता-असफलता को निश्चित करता है | लम्बोदर की चार भुजाएँ कहतीं हैं कि यदि जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो चहुंमुखी प्रयास करने होंगे | गणेश जी ने छोटे से जीव मूषक को अपनी सवारी बनाकर उसका गौरव बढ़ाया है | उनका यह प्रबंधन हमें सीख देता है कि संसार में चाहे कोई छोटा हो या बड़ा सबको सम्मान दो एवं सबके प्रति स्नेहभाव रखो |
इन सभी विशेषताओं के कारण ही गणपति सभी शुभ कार्यों में प्रथम पूजे जाते हैं | उनसे प्रार्थना की जाती है कि हमारे समस्त कार्य बिना किसी रुकावट के संपन्न हों | इस प्रकार यदि हम गणेश जी से प्रबंधन की कला सीखें तो जीवन में हम निश्चित रूप से सफल होंगे |
प्रश्न १ – गद्यांश में आए गणेश जी के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए |
उत्तर १ –  १ - ..............      २ - ................
प्रश्न २ – गणेश जी का मस्तक कैसा है और यह किसका प्रतीक है ?
उत्तर २ - ...................................................................................
..................................................................................................
प्रश्न ३ – गणेश जी ने किस प्राणी को अपनी सवारी चुना ? उनका यह चुनाव हमें क्या बताता है ?
उत्तर ३ - .....................................................................................
.....................................................................................................
प्रश्न ४ – सूप की क्या विशेषता है ?
उत्तर ४ - ..........................................................................................................................................................................................................
प्रश्न ५ – सभी देवी- देवताओं में गणेश जी का पूजन सर्वप्रथम होता है , क्यों ?
उत्तर ५ - ....................................................................................
...................................................................................................
प्रश्न ६ – निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –
१ – निश्चित  x .................. २ - सफलता x ..................
३ – सम्मान  x .................... ४ – शुभ    x ....................
प्रश्न ७ – ‘ता’ प्रत्यय वाले  दो शब्द लिखिए –
उत्तर – १ .................   २ .................
प्रश्न ८ – गद्यांश  का उचित शीर्षक लिखिए –
उत्तर - .................................................................................
प्रश्न  ९ – निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
१ विशाल .................. २  समस्त ...................
प्रश्न १० – गद्यांश में आए दो विशेषण शब्द लिखिए –
उत्तर  - १ .......................  २ .......................

.