Wednesday, 18 July 2018


                                  अपठित गद्यांश ३३ 

बात उन दिनों की है जब सिकंदर विश्व विजय के लिए अपनी बड़ी एवं शक्तिशाली सेना के साथ निकला हुआ था | कई देशों को जीतते हुए वह एक छोटे से देश में जा पहुँचा और उसे भी जीत लेने के लिए युद्ध प्रारंभ कर दिया | मगर वहाँ का राजा फिलिप बड़ा ही समझदार था | उसकी कुशाग्र बुद्धि के चर्चे दूर-दूर तक फैले हुए थे | सिकंदर की ताकत देखकर उसने सोच-समझकर रणनीति बनाई | योजनानुसार उसने अपनी सम्पूर्ण सेना मोर्चे पर खड़ी कर दी और युद्ध का नगाड़ा बजते ही युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी | युद्ध समाप्ति की घोषणा होते ही सिकंदर के सैनिकों ने राजा फिलिप को कैद कर लिया | उसे सिकंदर के सामने लाया गया | सिकंदर बोला “अब तुम हमारे गुलाम हो और हम तुम्हारे शासक | मगर तुमने  बिना लड़े ही हार क्यों मान ली” ? फिलिप ने उत्तर दिया – “ बादशाह सेना के सामने हमारी सेना कुछ भी नहीं | इस युद्ध में हमारी हार निश्चित थी , तो फिर बेगुनाहों का खून बहाकर क्या लाभ होता ?” फिलिप के उत्तर से प्रभावित होकर सिकंदर ने उसकी बेड़ियाँ खुलवा दीं | तभी वहाँ उन्हें कोलाहल सुनाई दिया | राजा फिलिप ने सिकंदर से पूछा “ यह बाहर क्या हो रहा है | सिकंदर बोला “ हमारे सैनिक आपके शहर में तबाही मचा रहे हैं और लोगों को लूट रहे हैं”| फिलिप ने बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा –“मगर बादशाह , अब ये शहर  मेरा नहीं , बल्कि आपका ही शहर है | आप अपने ही शहर और अपनी ही प्रजा को लूट रहे हैं | क्या लोग इसीलिए लोग आपको सिकंदर महान कहते हैं”| राजा फिलिप की बात सुनकर सिकंदर एक बार फिर राजा फिलिप की बुद्धि का कायल हो गया | उसने तुरंत कत्लेआम और लूटपाट को रुकवाने का आदेश दिया और उस देश की बागडोर फिलिप को ही सौंपकर वापस लौट गया |
प्रश्न १ - सिकंदर के बारे में आप क्या जानते हैं ? दो से तीन पंक्तियों में लिखिए|
प्रश्न २ - राजा फिलिप कैसा राजा था ?
प्रश्न ३ - राजा फिलिप ने युद्ध का नगाड़ा बजते ही युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी क्यों ?
प्रश्न ४ - राजा फिलिप के उत्तर को सुनकर सिकंदर ने क्या किया ?
प्रश्न ५ - सिकंदर राजा फिलिप की बुद्धि का कायल क्यों हुआ ?
प्रश्न ६ – गद्यांश से चार विशेषण शब्द चुनकर लिखिए –
प्रश्न ७ - गद्यांश से दो भाववाचक संज्ञा शब्द चुनकर लिखिए-
प्रश्न ८ – निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए –
क – प्रारंभ      ख – कत्लेआम       ग - कोलाहल    घ -   बागडोर
प्रश्न ९ - निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
क- गुलाम                ख- समझदार       ग- शहर           घ- प्रजा
प्रश्न १० - निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक शब्द गद्यांश से चुनकर लिखिए –
१ – जिसकी बुद्धि तेज हो –
२ – युद्ध जीतने हेतु बनायी जाने वाली योजना -


Saturday, 14 July 2018

                                             अपठित ३२ 


बच्चों को बचपन से ही निडर बनाएँ, उन्हें भयमुक्त जीवन दें | क्योंकि भय एक प्रकार का विकार है | भय से मनुष्य टूट जाता है और धीरे-धीरे उसके व्यक्तित्व का विकास भी रुक जाता है | भय की कोई वास्तविकता नहीं होती | इसे अपने पास फटकने न दें | यह स्वयं हमारे द्वारा पैदा किया हुआ एक दोष होता है | खेल-खेल में हम बच्चों को भयभीत करते हैं, कुछ बच्चे तो बड़े होने पर उस भय से बाहर निकल जाते हैं किन्तु कुछ नहीं | ऐसे बच्चे जीवन के अंत तक डरपोक ही बने रहते हैं | मनोविज्ञान भय को एक विकार मानता है | जब मनुष्य मन से भयभीत होता है, तो उसके मस्तिष्क की ग्रन्थियाँ सक्रिय होकर एक प्रकार का स्राव प्रवाहित करती हैं | इस कारण उसकी मानसिक दृढता कमजोर हो जाती है | इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरह से पड़ता है | अतः बच्चों को बचपन से ही बहादुर बनाने का प्रयास करें | उन्हें धर्मवीर , शूरवीर या कर्मवीर बनाएँ | जैसे शिवाजी की माँ ने उन्हें बनाया | बच्चों के मन में प्रारम्भ से ही अच्छे संस्कार डाले जाएँ और उन्हें समाज के हित के लिए कार्य करने की प्रेरणा दी जाए | यदि बच्चों के कोमल मन में उच्च आदर्शों एवं शिक्षा तथा संस्कारों का मेल होगा तो वे स्वयं ही कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित होंगे | भयभीत व्यक्ति जीवन के हर क्षेत्र में असफल ही होता है | इसके विपरीत जिसके पास आत्मविश्वास व आंतरिक मजबूती है वह बड़े से बड़ा काम चुटकी बजाते ही कर लेता है | यदि हमें डरना है तो पाप से डरें, कुकर्म से डरें | ईश्वर ने हमें डरपोक बनकर जीने के लिए नहीं भेजा है | आप भयमुक्त जीवन जीना सीखें | अपने भीतर छुपी हुई शक्तियों को जाग्रत कर उन्नति के शिखर को छुएँ | सत्कार्यों से निर्भयता आती है एवं जीवन सत्यम, शिवम् एवं सुन्दरम की स्थिति को प्राप्त होता है |

   प्रश्न १ – गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए –
क-       क -   उच्च आदर्श      ख – अच्छे संस्कार     ग – बहादुर जीवन घ – भयमुक्त जीवन

प्रश्न २ – डरपोक शब्द का उचित विलोम शब्द को चुनिए |
क – कायर        ख- बहादुर       ग – सत्य            घ –जीना

प्रश्न ३ – पाप शब्द का उचित विलोम शब्द को चुनिए |
क – पुण्य        ख – कुकर्म       ग – शक्ति           घ – पापी

प्रश्न ४ -  उन्नति शब्द का उचित पर्यायवाची  शब्द को चुनिए |
क – अवनति      ख – अधोगति    ग- प्रगति       घ – प्रगतिशील

प्रश्न ५ – जीवन के अंत तक बच्चे भयभीत क्यों बने रहते हैं ? स्पष्ट कीजिए |

प्रश्न ६ – ‘बच्चे निडर बनें’ इसके लिए माता-पिता को क्या प्रयास करना चाहिए ?

प्रश्न ७ – गद्यांश में हमें किससे डरने के लिए कहा गया है ?

प्रश्न ८ – गद्यांश में आए ‘ता’ प्रत्यय वाले दो शब्द ढूंढकर लिखिए |

प्रश्न ९ – भयभीत व्यक्ति एवं निडर व्यक्ति के बीच क्या अंतर होता है ? स्पष्ट कीजिए |

प्रश्न १० - जीवन में सत्यम, शिवम् एवं सुन्दरम की स्थिति कब प्राप्त होती है ?

Friday, 1 June 2018



                          अपठित ३१ 
कहा जाता है कि यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात का मुख सौंदर्य विहीन था | किन्तु उनके विचारों में अत्यंत प्रबल सुन्दरता थी अतः लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे | एक बार वे अपने शिष्यों के साथ बैठे हुए थे, तभी एक ज्योतिषी वहाँ आया वह सुकरात को जानता नहीं था | उसने सुकरात का चेहरा देखकर बताया कि तुम्हारे नथुनों की बनावट बता रही है कि तुममें क्रोध की भावना अत्यंत प्रबल है | यह सुनकर सुकरात के शिष्य नाराज होने ,किन्तु सुकरात ने उन्हें रोक लिया | ज्योतिषी ने आगे बताया कि तुम्हारे सिर की आकृति तुम्हारे लालची होने का प्रमाण दे रही है, ठुठडी की बनावट से तुम सनकी और होठों से तुम देशद्रोह के लिए तत्पर प्रतीत होते हो | यह सुनकर सुकरात ने ज्योतिषी को पुरस्कार दिया | सुकरात के शिष्यों ने इसका कारण पूछा तो सुकरात ने स्पष्ट किया कि ये सारे दुर्गुण मुझमें हैं किन्तु ज्योतिषी मुझमें स्थित विवेक की शक्ति को न देख सका जिसके कारण मैं इन सभी दुर्गुणों को नियंत्रण में रखता हूँ | 
हर इंसान को अपने भीतर स्थित विवेक को जागृत कर सदैव दुर्गुणों को काबू में रखना चाहिए |  

उपरोक्त गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

प्रश्न १- सुकरात किस देश के निवासी थे ?

प्रश्न २ – सुकरात देखने में कैसे थे ?

प्रश्न ३ – ज्योतिषी ने उनके नथुनों को देखकर क्या कहा ?

प्रश्न ४ – ज्योतिषी ने सिर की आकृति देखकर सुकरात के बारे में  क्या आंकलन किया ?

प्रश्न ५ – सुकरात के विचारों के बारे में बताइए |

प्रश्न ६ – ज्योतिषी की बात सुनकर सुकरात ने उसके साथ क्या किया ?

प्रश्न ७ – सुकरात ने अपने शिष्यों को अपने दुर्गुणों के बारे में क्या कहा ?

प्रश्न ८ – निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए -

    १     इंसान -                  २ – शक्ति -

प्रश्न ९ – निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए –

      १-    नाराज -               २ – दुर्गुण -  
            
प्रश्न  १० – गद्यांश से दो संज्ञा शब्द छांटकर लिखिए –

      क -                    ख -                    



Wednesday, 23 May 2018



                              अपठित ३० 
 शिक्षा मनुष्य को मनुष्य बनाती है | शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान होता है | शिक्षित मनुष्य ही राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकते हैं | वैसे तो मनुष्य की प्रथम पाठशाला उसका परिवार होता है और उसकी प्रथम गुरु उसकी माँ होती है जो नवजात शिशु में संस्कारों को सिंचित करती रही है | जब तक बच्चा विद्यालय जाने के योग्य नहीं हो जाता परिवार में माँ के अतिरिक्त अन्य सदस्य भी उसके गुरु की भांति उसे शिक्षित करते रहते हैं | परिवार के बाद शिक्षा प्राप्त करने का सबसे अच्छा स्थान विद्यालय होता है | यहाँ आकर उसका सर्वांगीण विकास होता है | विद्यालय में पुस्तकीय ज्ञान के अलावा उसे नृत्य-संगीत एवं खेल-कूद आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाता है | छात्रों द्वारा अपनी-अपनी रूचि के अनुसार खेलों का चयन किया जाता है | चुनी हुई गतिविधियों में दक्षता प्राप्त कने के लिए वे दिन-रात अथक परिश्रम करते हैं | विद्यालय के प्रशिक्षक भी उनमें जान डालने का कार्य करते हैं तभी ऐसे विद्यार्थी देश का नाम विश्व में स्वर्णाक्षरो में लिखवा देते हैं |
प्रश्न १- शिक्षा के बिना मनुष्य किसके समान होता है ?
प्रश्न २- मनुष्य की प्रथम गुरु कौन होती है ?
प्रश्न ३- परिवार के बाद मनुष्य कहाँ शिक्षा प्राप्त करता है ?
प्रश्न ४- विद्यालय में पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक्त और क्या-क्या सिखाया जाता है ?
प्रश्न ५- कैसे मनुष्य राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान कर सकते हैं ?
प्रश्न ६- ऐसे किन्हीं दो खिलाडियों के नाम लिखिए जिन्होंने विश्व-स्तर पर नाम कमाया हो |
प्रश्न ७- गद्यांश में आए दो संयुक्ताक्षर लिखिए |
प्रश्न ८- निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए
क – बच्चा                ख – देश                                        
प्रश्न ९- निम्नलिखित शब्द का अर्थ समझाइये –
‘अथक परिश्रम’
प्रश्न १०- प्रस्तुत गद्यांश को क्या नाम देना चाहेंगे ?                                                    

Sunday, 29 April 2018


अपठित २९ 

नजर उठाकर जहाँ भी देखें आपको हर इंसान दुःख ,अवसाद ,तृष्णा ,घृणा ,नफरत ,ईर्ष्या आदि जैसे दुर्गुणों से त्रस्त दिखाई देगा | प्रत्येक इंसान तनावग्रस्त है | जीवन शैली इतनी नीरस हो चुकी है कि उमंग-उल्लास तो नदारद हो गए हैं जीवन से | भौतिक सुखों को तलाशते  हुए  व्यक्ति अपनी आंतरिक शक्तियों को विस्मृत कर चुका है | अनंत सुखों का स्वामी होकर भी व्यक्ति दरिद्र बना हुआ है, वह निरंतर दुःख और तनाव से पीड़ित है | वह कितने ही भौतिक संसाधनों का अम्बार लगा ले, कभी भी सुखी नहीं हो सकता जब तक वह अपने भीतर सुख नहीं ढूंढेगा तब तक दुखों से कैसे मुक्ति पायेगा ? हमें सुख की प्राप्ति के लिए  पीछे मुड़कर अपनी समृद्ध परम्परा को देखना होगा, अपनाना होगा अपनी प्राचीन पद्धतियों को, जिनसे हमें एक सशक्त मार्ग मिलेगा जिसे हम योग कहते हैं | हमारे भीतर अनंत शक्तियां छिपी हैं, आवश्यकता है उन्हें जगाने की | योग ही एक ऐसा उत्तम एवं सरल मार्ग है जिसके द्वारा हम अपनी शक्तियों को जगाकर अनंत आनंद ,शक्तियों एवं शांति को प्राप्त कर सकते हैं | महर्षि पतंजलि ने योगशास्त्र में लिखा है मन की वृत्तियों  को रोकना ही योग है | यदि हम  अपने अंतःकरण को पवित्र कर मन को नियंत्रित कर सद्कर्म करते हुए जीवन यापन करें तो स्वयं तो अनंत आनंद को प्राप्त करेंगे ही साथ ही सभी को सुख प्रदान करेंगे | तभी सर्वे भवन्तु सुखिनः की उक्ति चरितार्थ होगी तथा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना बलवती होगी | न कोई मार-काट होगी, न किसी से कोई आतंकित होगा | वसुंधरा भी शस्यश्यामला होगी , वायु एवं जल भी सुगन्धित होंगे | बस आवश्यकता है तो सिर्फ इस बात की, कि हम अपने मन में उठते  बुरे विचारों को नियंत्रित करें और जन-कल्याण को महत्त्व दें | इन सबकी प्राप्ति हमें योग द्वारा हो सकती है | तो क्यों न हम आज से बल्कि अभी से योग अपनाएँ और जीवन को सुखी बनाएँ | 

उपरोक्त अनुच्छेद को ध्यान से पढ़कर निम्नांकित प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

प्रश्न १- वर्तमान समय में मनुष्य कौन से दुर्गुणों से त्रस्त है ?
प्रश्न २- मनुष्य दुखों से कैसे मुक्ति पायेगा ?
प्रश्न ३ हमें सुख की प्राप्ति के लिए क्या करना चाहिए ?
प्रश्न ४ योग के द्वारा चरितार्थ होने वाली उक्तियों को लिखिए |
प्रश्न ५ आपने अनुच्छेद को ध्यान से पढ़ा है , आप इसे क्या नाम देना चाहेंगे ?
प्रश्न ६ - निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए -
क - सुखी -                                            ख - अनंत -
ग -  जीवन                                            घ - स्वामी
प्रश्न ७ - निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए -
क- आनंद -  १-                             २ -
ख- इंसान - १-                              २ - 
प्रश्न  ८ - गद्यांश से चुनकर कोई  दो  संयुक्ताक्षर  शब्द  लिखिए -
१-                                               २-
                                             
     

Sunday, 11 February 2018



                             अपठित २८ 
अहंकार एक ऐसा दुर्गुण है जो क्रमशः मनुष्य का,परिवार का ,समाज का देश का और अंततः मानव जाति का नाश कर डालता है | अहंकारवश मनुष्य पापकर्म करता रहता है और इसी का प्रतिफल उसे जन्म-जन्मान्तर भुगतना पड़ता है | अहंकार एक राक्षसी प्रवृत्ति है | इस प्रवृत्ति की छाया में अन्य दुर्गुण एकत्रित होकर मनुष्य को पूरा राक्षस बना देते हैं | हमारे धर्म ग्रन्थों में राक्षसों की चर्चा हर युग में मिलती है | आज भी राक्षसी प्रवृत्तियों वाले लोग बहुतायत मिल जाते हैं | ऐसे लोगों के बारे में तो तुलसीदास जी का रामचरितमानस में लिखित कथन आज भी उतना ही सत्य है कि राक्षस मौका मिलने पर अपने हितैषियों का भी अहित करने से नहीं चूकते | दूसरों के अहित में ही इन्हें अपना लाभ दिखाई देता है | दूसरों के उजड़ने में इन्हें हर्ष एवं उनकी उन्नति में ये बेहद कष्ट का अनुभव होता है | ये दूसरों की बुराई करते हैं | दूसरों के दोषों को असंख्य नेत्रों से देखते हैं | दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए दूध में मक्खी की भांति गिर जाते हैं | ये दूसरों का काम बिगाड़ने के लिए अपने प्राण तक गँवा देते हैं | अहंकार के कारण ये ईश्वर पर विश्वास न कर अपने ही निर्णयों को सर्वश्रेष्ठ मान दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं | राक्षसी प्रवृत्ति के लोग नैतिक को अनैतिक मानते हैं, इस कारण आस-पास का वातावरण नकारात्मक हो जाता है | ऐसी बुरी प्रवृत्ति की बढ़त के कारण पृथ्वी ने प्रभु के समक्ष निवेदन किया कि “हे भगवान मुझे पर्वत ,वृक्षों आदि का भार इतना महसूस नहीं होता जितना नकारात्मक एवं दुष्प्रवृत्ति के लोगों के कारण होता है”| ऐसे लोगों को अपने दुष्कर्मों का प्रतिफल आने वाले जन्मों में भोगना ही पड़ता है | अतः मनुष्य को स्वाध्याय के माध्यम अपने भीतर झाँकना चाहिए एवं उस द्वार को पूर्णतः कसकर बंद कर देना चाहिए जहाँ से दुष्प्रवृत्तियों के आने की संभावना हो | इस प्रयास से ही मानवता जीवित रह पाएगी तथा धरती माँ भी सही अर्थों में वसुन्धरा बन पाएगी |
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
प्रश्न १- अहंकार के बारे में आपके क्या विचार हैं ? कम से कम तीन वाक्यों में स्पष्ट करिए |  
प्रश्न २- गद्यांश में प्रयुक्त कहावत को लिखिए | १
प्रश्न ३- कैसे लोगों के कारण वातावरण नकारात्मक हो जाता है ? १
प्रश्न ४- पृथ्वी ने भगवान से क्या निवेदन किया था ? १
प्रश्न ५- गद्यांश से पृथ्वी शब्द के दो पर्यायवाची शब्द ढूंढ़कर लिखिए | १
प्रश्न ६- गद्यांश से दो शब्द उपसर्ग वाले तथा दो शब्द प्रत्यय ढूंढ़कर लिखिए | २
प्रश्न ७- इन शब्दों के विलोम शब्द लिखिए -१  
क-  लाभ x -----------------     ख- धरती x -----------------------

Saturday, 3 February 2018

अपठित गद्यांश ! समस्या नहीं , अब केवल समाधान :                         अपठित २७    कहते हैं न कि...


कहते हैं न कि...
:                          अपठित २७      कहते हैं न कि यदि लगन लग जाए तो कोई भी कार्य पूर्ण होते देर नहीं लगती | और यदि लगन रचनात्मक एवं सक...